
टमाटर (कदम 6)
एकीक्रत कीट प्रबंधन
मुख्य कीट & प्रबंधन
1. टमाटर फल छेदक (हेलिकोवर्पा आर्मीजेरा)
लक्षण
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छोटी लार्वा कोमल पत्तियों को खाते है।
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परिपक्व लार्वा फलों में गोलाकार छेद बनाकर प्रवेश करता है।
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लार्वा अपने शरीर का केवल भाग ही फल के अंदर डालता है और अंदर का गूदा खाता है।
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अधिक प्रकोप होने पर छिद्रित फल सड़ने लगते हैं।
प्रबंधन:
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फूल आने की शुरुआत के समय फेरोमोन ट्रैप @10/एकड़ (फसल छतरी से 1 फीट ऊपर) लगाएँ तथा ल्यूअर को समय-समय पर बदलते रहें।
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प्रति एकड़ 10–15 बर्ड पर्चेस (टी आकार) लगाएँ।
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प्रत्येक 15 पंक्तियों के बाद 45 दिन पुराने गेंदा के पौधे लगाएँ तथा पहली एवं अंतिम पंक्ति गेंदा की रखें। फूलों की कटाई सप्ताह में दो बार करें।
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रोपाई के 40 दिन बाद से ट्राइकोकार्ड @4/एकड़/सप्ताह की दर से छोड़ें।
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एच. आर्मिगेरा एनपीवी 0.43% एएस @3.0 मिली लीटर/लीटर या 2% एएस @1.0 मिली लीटर/लीटर का छिड़काव करें।
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मेटारिज़ियम एनिसोप्लिया या ब्यूवेरिया बैसियाना @1–2 किलो ग्राम/एकड़ या स्पाइनोसैड 45% एससी @0.3 मिली लीटर/लीटर या क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी @ 60 मिली लीटर/ एकड़ या एमेमेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी @100 ग्राम/ एकड़ या फ्लूबेन्डियामाइड 39.35% एससी @50 मिली लीटर/ एकड़ का छिड़काव करें, यदि लगातार 4 दिनों तक प्रति ट्रैप 10 पतंगे पाए जाएँ।
2. दक्षिण अमेरिकी लीफ माइनर – टुटा एब्सोलुटा
लक्षण
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लार्वा पत्तियों की सतह पर पारदर्शी (खिड़की जैसी) परतें बनाते हैं।
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ये नई कोंपलों, पत्तियों और तनों को खाते हैं।
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फलों पर छोटे-छोटे पिन के आकार के छेद होते हैं, जिनमें मल हो भी सकता है और नहीं भी।
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गंभीर प्रकोप होने पर फसल सूखी/जली हुई दिखाई देती है।
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20-23 डिग्री सेल्सियस का तापमान इनकी संख्या में वृद्धि के लिए अनुकूल होता है।
प्रबंधन:
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फसल के बॉर्डर के चारों ओर 10-15 फीट की दूरी पर या उससे 10-15 फीट बाहर, जमीन से 2-2.5 फीट ऊपर फेरोमोन ट्रैप लगाएं।
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इन्हें फसल की पत्तियों से 5 सेमी ऊपर लगाएं।
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रोपण के समय और 30 दिन बाद प्रति एकड़ 250 किलो ग्राम नीम की खली डालें।
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हर 15 दिन के अंतराल पर सुबह के समय 240 मिली लीटर/ एकड़ की दर से साइएंट्रानिलिप्रोल 10.26% OD, 60 मिली लीटर/ एकड़ की दर से क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी या 200 मिली लीटर/ एकड़ की दर से इंडोक्साकार्ब 14.5% SC का छिड़काव करें।
3. अमेरिकी लीफ माइनर (लिरियोमिज़ा ट्राइफोलि
लक्षण
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पत्तियों पर सर्पाकार सुरंगें - कागज़ जैसी दिखती हैं।
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दो प्रकार की सुरंगें: जीवित और मृत, एक ही पत्ती पर दिखाई देती हैं।
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संक्रमित पत्तियों का सूखना और मुरझाना।
प्रबंधन:
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खेत के चारों ओर अरंडी को ट्रैप फसल के रूप में लगाएं। रोपाई से पहले क्षतिग्रस्त पत्तियों को हटा दें।
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प्यूपेशन को कम करने के लिए मल्च का प्रयोग करें।
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वयस्क कीटों को पकड़ने के लिए पीले स्टिकी ट्रैप का प्रयोग करें।
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सुबह के समय इमेमेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी @ 100 ग्राम/ एकड़ या स्पाइनेटोरम 11.7 एससी @150-180 मिली लीटर/एकड़ या एबामेक्टिन 1.9 ईसी @180-240 मिली लीटर/एकड़ का छिड़काव करें।
4. सफ़ेद मक्खी (बेमिसिया टैबेकाइ)
लक्षण
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पत्तियों के निचले भाग से रस चूसने के कारण पत्तियां पीली, झुर्रीदार और मुड़ी हुई हो जाती हैं।
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शहद जैसे चिपचिपे पदार्थ के स्राव से सूटी मोल्ड रोग हो जाता है।
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यह टमाटर लीफ कर्ल विषाणु (टीओएलसीवी) और अन्य विषाणुओं का प्रमुख वाहक है।
प्रबंधन
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खेत के बॉर्डर के चारों ओर और प्रत्येक 15-20 पंक्तियों के बीच मक्का/ज्वार की पाँच से छह घनी पंक्तियाँ उगाएँ।
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मौसम और कीटों की संख्या के आधार पर 20-40 पीले स्टिकी ट्रैप प्रति एकड़ की दर से लगाएँ।
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हिरसुटेला थॉम्पसोनी पर 1 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से या इमिडाक्लोप्रिड 200 एसएल पर 60-70 मिली लीटर प्रति एकड़ की दर से; या थियामेथॉक्सम 25 डब्ल्यूजी पर 80 मिली लीटर प्रति एकड़ की दर से; या स्पाइरोमेसिफेन 22.9
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एससी पर 250 मिली लीटर प्रति एकड़ की दर से; या डायफेंथियूरॉन 50% डब्ल्यूपी पर 240 मिली लीटर प्रति एकड़ की दर से; या इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यूजी पर 20 मिली लीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
5. तैला
लक्षण
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पत्ती की सतह पर चांदी के रंग की धारियाँ बन जाती हैं ।
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पत्तियाँ समय से पहले झड़ जाती हैं।
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थ्रिप्स के कारण कली गलने लगती हैं।
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यह कीट टमाटर चित्तीदार विल्ट (टीएसडबल्यूवी) को भी फैलता है।
प्रबंधन
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खेत के बॉर्डर पर तथा प्रत्येक 15–20 पंक्तियों के बाद मक्का/ज्वार की 1–2 मोटी कतारें उगाएँ।
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नीले स्टिकी ट्रैप @20–40/एकड़ (मौसम एवं कीट प्रकोप के अनुसार) लगाएँ।
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हिर्सुटेला थॉम्पसॉनी @1 किलो ग्राम/एकड़ या इमिडाक्लोप्रिड 200 एसएल @60–70 मिली लीटर/एकड़; या थायमेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी @80 मिली लीटर/एकड़; या स्पाइरोमेसिफेन 22.9 एससी @250 मिली लीटर/एकड़; या डाइफेन्थियूरॉन 50% डब्ल्यूपी @240 मिली लीटर/एकड़; या इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यूजी @20 मिली लीटर/एकड़ का छिड़काव करें।
6. रेड स्पाइडर माइट्स (टेट्रानिकस यूरटिके)
लक्षण
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ऊपरी पत्ती सतह पर पीले/सफेद धब्बों के समूह दिखाई देते हैं।
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पत्तियों का रंग बदलकर हल्का या कांस्य जैसा दिखाई देने लगता है।
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गंभीर प्रकोप में पत्तियाँ हल्की होकर मुड़ जाती हैं तथा मुड़ी हुई पत्तियों के अंदर रेशमी जाले दिखाई देते हैं।
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अधिक प्रकोप की स्थिति में फलों पर भी पीले/सफेद धब्बे दिखाई देते हैं।
प्रबंधन
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पत्तियों की निचली सतह पर छिड़काव करें: एजैडिरैक्टिन 10,000 पीपीएम @1 मिली लीटर/लीटर या वेटेबल सल्फर 80% डबल्यूपी @3 ग्राम/लीटर या एबामेक्टिन 1.9% ईसी @ 200 मिली लीटर/ एकड़ या स्पाइरोमेसिफेन 22.9% एससी @ 250 मिली लीटर/ एकड़ या फेनाज़ाक्विन 10 ईसी @ 500 मिली लीटर/ एकड़
7. पत्ती खाने वाली इल्ली (स्पोडोप्टेरा लिट्यूरा)
लक्षण
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छोटी लार्वा पत्तियों की निचली सतह को खुरचती हैं (जिससे ‘विंडो पैनिंग’ जैसा प्रभाव दिखाई देता है जिसमे पत्ती पारदर्शी/कांच जैसी पतली दिखाई देती है)।
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बड़ी अवस्था की लार्वा फसल की सारी पत्तियाँ गिरा देती है।
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प्रारंभिक अवस्था में लार्वा समूह में भोजन करती हैं।
प्रबंधन
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प्रति एकड़ 5-6 फेरोमोन ट्रैप लगाएं।
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ट्रैप फसल के रूप में बॉर्डर और सिंचाई नहर के किनारे अरंडी उगाएं।
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प्यूपा को उजागर करने और नष्ट करने के लिए मिट्टी की जुताई करें।
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ईटीएल पर 800 मिली लीटर /एकड़ की दर से क्लोरपाइरीफोस 20 ईसी का छिड़काव करें।
कीट प्रबंधन में अपनाई जाने वाली कुछ महत्वपूर्ण प्रैक्टिस:
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केवल स्वस्थ पौधों का ही प्रयोग करें जिन्हें जालीदार घर के नीचे ट्रे में उगाया गया हो।
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निर्धारित समय-समय पर स्टिकी और फेरोमोन ट्रैप बदलें।
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चूसने वाले कीटों और टुटा एब्सोलुटा के मामले में, पहले छिड़काव के रूप में एजैडिराक्टिन 10,000 पीपीएम @1 मिली लीटर/लीटर पानी का प्रयोग कीटों को नियंत्रित करने और प्रतिरोधक क्षमता को रोकने में सहायक होता है।
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दूसरे छिड़काव के रूप में, यदि केवल स्पोडोप्टेरा लिटुरा न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस वायरस (एसआईएनपीवी) या हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस वायरस (एचएएनपीवी) को 3.0 मिली लीटर/लीटर की दर से 0.43% एएस या 1.0 मिली लीटर प्रति लीटर की दर से 2% एएस का छिड़काव करें, यदि टुटा एब्सोलुटा के साथ संक्रमण हो तो बीटी किस्म कुरस्ताकी को 1 मिली लीटर/लीटर की दर से छिड़काव करें।
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यदि फल छेदक, टी. एब्सोलुटा और एस. लिटुरा का प्रकोप ठंडे और आर्द्र मौसम के साथ बना रहता है, तो तीसरे छिड़काव के रूप में ब्यूवेरिया बेसिआना को निर्धारित मात्रा में छिड़काव करें।
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कीड़े के प्रकोप की स्थिति में चौथे छिड़काव के रूप में क्लोरेंट्रानिलिप्रोले 18.5 एससी को 60 मिली लीटर/एकड़ की दर से छिड़काव करें।
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पांचवें छिड़काव के लिए स्पाइनोसाड या स्पाइनेटोरम को कीड़ों के लिए निर्धारित मात्रा में छिड़काव करें।
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दो लगातार छिड़काव के बीच 10-15 दिनों का अंतराल रखें, विशेषकर दूसरे छिड़काव के बाद। कीटों की संख्या में कमी या क्षति की निगरानी करते रहें।
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एक ही सिंथेटिक रसायन का लगातार दूसरी बार प्रयोग न करें।