टमाटर (कदम 2)

नर्सरी प्रबंधन

नर्सरी प्रबंधन (रोपाई से पहले)

1 नर्सरी उगाना – कोकोपीट ट्रे विधि

पैरामीटर

विवरण

विधि

ग्रीनहाउस / प्रो-ट्रे में कोकोपीट से भरी ट्रे में पौध तैयार करें – इससे रोगमुक्त एवं स्वस्थ पौध प्राप्त होता है

कोकोपीट पीएच / ईसी

पीएच: 5.8–7.0 | ईसी: <1 एमएस/सेमी

स्थिति के अनुसार, 300 किलो ग्राम कोकोपीट को 1 किलो ग्राम ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें

ट्रे की विशिष्टताएँ

उल्टे पिरामिड आकार की कैविटी: 25 मिमी × 25 मिमी × 32 मिमी गहरी (शंकु आकार जड़ों की वृद्धि को सीमित करता है)

निचले भाग में छेद ≥ 2 मिमी होना चाहिए

बीज उपचार

यदि बीज, विक्रेता कंपनी द्वारा उपचारित नहीं किए गए हों, तो बीज एवं मृदा जनित फफूंदजनित रोगों की रोकथाम के लिए बीजों को थिरम या मैनकोजेब @3 ग्राम/किलो ग्राम बीज या कार्बेन्डाजिम @1 ग्राम/किलो ग्राम बीज या ट्राइकोडर्मा विरिडी @5–10 ग्राम/किलो ग्राम बीज से उपचारित करना चाहिए।

बीजों को स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस @5–10 ग्राम/किलो ग्राम बीज से उपचारित करने से सूत्रकृमि के प्रकोप की रोकथाम में सहायता मिलती है।

बुवाई

प्रत्येक कैविटी में 25–40 सेमी ग्रोइंग मीडिया भरना आवश्यक है। बोए गए बीजों के ऊपर कोकोपीट की परत बीज के व्यास की 1–1.5 गुना गहराई तक बिछानी चाहिए।

 

2. नर्सरी मे पोषक तत्वों का प्रबंधन

अवस्था (बुवाई के बाद)

पोषक तत्व का शेड्यूल

बुवाई के 0–7 दिन बाद

किसी पोषक तत्व की आवश्यकता नहीं होती है

बुवाई के 8–16 दिन बाद

19:19:19 पर्णीय छिड़काव @5 ग्राम/10 लीटर

बुवाई के 16–19 दिन बाद

19:19:19 पर्णीय छिड़काव @10 ग्राम/10 लीटर

बुवाई के 19–22 दिन बाद

19:19:19 पर्णीय छिड़काव @15 ग्राम/10 लीटर

बुवाई के 22–24 दिन बाद

19:19:19 पर्णीय छिड़काव @20 ग्राम/10 लीटर

बुवाई के 10-24 दिन बाद

आवश्यकतानुसार 3 ग्राम/लीटर सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है

3. नर्सरी मे सिंचाई प्रबंधन
  • कोकोपीट को नम रखना चाहिए, लेकिन उसमें बहुत अधिक पानी नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे पौधों में फफूंद जनित रोग हो सकते हैं।
  • मौसम के अनुसार दिन में 2-3 बार ही सिंचाई करें, वह भी सुबह और अंकुरण के बाद।
  • शाम को सिंचाई करने से पानी की बूँदें पत्तियों पर रह जाती हैं, जिससे रोग लग सकते हैं।
  • पौधों को मजबूत बनाने के लिए अंतिम सप्ताह में पानी कम देना चाहिए।
4. नर्सरी मे पौध संरक्षण
  • डैम्पिंग ऑफ एक महत्वपूर्ण रोग है, जिसमें जड़ क्षेत्र में रोगजनक के संक्रमण के कारण पूरा पौधा गिरकर नष्ट हो जाता है।
  • आवश्यकता के अनुसार, पौधों में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 डब्ल्यूपी @3 ग्राम/लीटर की दर से ड्रेंचिंग की जा सकती है।