टमाटर (कदम 1)

परिचय

  • टमाटर (सोलनम लाइकोपर्सिकम) भारत की सबसे महत्वपूर्ण सब्जी की फसलों में से एक है और विश्व स्तर पर उगाई जाने वाली प्रमुख सब्जियों में इसका स्थान है। यह लाइकोपीन, विटामिन सी एवं ए तथा खनिजों का समृद्ध स्रोत है, जिससे यह पोषण और व्यावसायिक प्रसंस्करण के लिए अत्यधिक मूल्यवान बनता है। इसके प्रमुख उत्पादक राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं गुजरात शामिल हैं। सिंचित परिस्थितियों में टमाटर की खेती खरीफ, रबी एवं ज़ायद मौसम में की जा सकती है।
  • मल्चिंग, सिंचाई एवं पोषक तत्वों की आपूर्ति हेतु सूक्ष्म सिंचाई, स्टेकिंग तथा समेकित कीट प्रबंधन रणनीतियों जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाकर टमाटर की उपज एवं उत्पाद की गुणवत्ता में वृद्धि की जा सकती है, साथ ही शुद्ध लाभ में भी बढ़ोतरी की जा सकती है।

जलवायु & आवश्यक मृदा

पैरामीटर

विवरण

तापमान

अनुकूल तापमान: 21–28 डिग्री सेल्सियस (दिन), 15–20 डिग्री सेल्सियस (रात्रि)। 10 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर बीज एवं परागकणों का अंकुरण प्रभावित होता है। 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर वृद्धि एवं पौधों की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

फल लगने के लिए रात्रि का तापमान एक महत्वपूर्ण कारक है तथा 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान होने पर फूल झड़ने लगते हैं।

फल में लाल वर्णक केवल तभी विकसित होता है जब तापमान 15–30 डिग्री सेल्सियस के बीच हो। इस सीमा से अधिक तापमान पर केवल पीला वर्णक बनता है।

जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है, तब कोई भी वर्णक नहीं बनता है।

रंग विकास के लिए अनुकूल तापमान: 21–24 डिग्री सेल्सियस है। 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर लाइकोपीन का निर्माण बाधित हो जाता है।

मृदा

ग्रीष्म ऋतु में हल्की चिकनी बनावट वाली मिट्टी उपयुक्त होती है (नमी को बनाए रखती है)। वर्षा ऋतु में बलुई दोमट मिट्टी (अच्छी जल निकासी) उपयुक्त होती है

अनुकूल पीएच: 6.0–7.5