
धान की खेती (कदम 7)
कीट प्रबंधन
प्रमुख कीट
1. धान का तना छेदक
पहचान हेतु अनुशंसाएँ
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बालियाँ सफेद, सीधी एवं खाली हो जाती हैं।
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पौधे के निचले तने में छेद दिखाई देते हैं।
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ईटीएल (आर्थिक क्षति स्तर) पार होते ही तुरंत छिड़काव करें।.
लक्षण-
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लार्वा जुलाई से अक्टूबर के दौरान तने में छेद करता है; इसके कारण युवा पौधों में ‘डेड हार्ट’ (केंद्रीय प्ररोह का पीला पड़कर सूख जाना) तथा परिपक्व पौधों में ‘व्हाइट ईयर’ (खाली, सफेद बालियाँ) दिखाई देती हैं।
ईटीएल: 5% डेड हार्ट/5% सफेद बालियाँ
चित्र: लेजर लेवलिंग के माध्यम से खेत की तैयारी
प्रबंधन-
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जिन खेतों में 5% से अधिक डेड हार्ट (आर्थिक क्षति स्तर, ईटीएल) दिखाई दें, उनमें रोपाई के 15–25 दिन बाद क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 0.4% जीआर @4 किग्रा/एकड़ का बुरकाव करें। इसके बाद रोपाई के 30–40 दिन बाद डेल्टामेथ्रिन 11% डब्ल्यू/डब्ल्यू एससी @60–75 मिली/एकड़ का पर्णीय छिड़काव करें तथा रोपाई के 45–50 दिन बाद क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5% डब्ल्यू/डब्ल्यू एससी @60 मिली/एकड़ या फ्लूबेंडियामाइड 20% डब्ल्यूडीजी @60 ग्राम/एकड़ का छिड़काव करें। आगे आवश्यकता अनुसार जब भी क्षति आर्थिक क्षति स्तर (ईटीएल) तक पहुँचे, इनमें से किसी भी कीटनाशक का पुनः प्रयोग करें। कीट की प्रारंभिक अवस्था में नीम-आधारित जैव-कीटनाशक का प्रयोग प्राथमिकता से करें।
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रैटून फसल लेने से बचें।
जैविक प्रबंधन
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तना छेदक कीट की उपस्थिति पर अंड परजीवी ट्राइकोग्रामा चिलोनिस एवं ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम @1 लाख/हेक्टेयर की दर से छोड़ें।
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प्राकृतिक शत्रुओं जैसे एपैन्टेलीस, ब्रैकॉन, प्लैटिगैस्टर, कोक्सीनेलिड्स, टेलीनोमस, मकड़ियाँ, ट्राइकोग्रामा आदि का खेत में संरक्षण करें।
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शिकारी पक्षियों के लिए बर्ड पर्च (बैठने की जगह) तैयार करें।
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तना छेदक के अंड समूहों को एकत्र कर बाँस के पिंजरे में रखें तथा निकलने वाली सूंडियों को नष्ट करें।
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तना छेदक के सामूहिक नियंत्रण हेतु फेरोमोन ट्रैप @10 ट्रैप/एकड़ लगाएँ।
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सूंडी परजीवी अमाउरोमॉर्फा एक्सेप्टा, कोटेसिया फ्लैविपेस एवं ब्रैकॉन प्रजातियों को छोड़ें, जो तना छेदक की सूंडियों पर परजीवीकरण करती हैं।
2. पत्ती मरोड़क
पहचान हेतु अनुशंसाएँ
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पत्तियाँ किनारों से मुड़कर नली के आकार की हो जाती हैं।
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मुड़ी हुई पत्तियों के अंदर हरे रंग की सूंडियाँ दिखाई देती हैं।
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पत्तियों का हरित लवक नष्ट हो जाता है तथा उन पर सफेद/सूखी धारियाँ दिखाई देती हैं।
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पत्तियाँ झुलसी हुई एवं सूखी प्रतीत होती हैं।
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ईटीएल (आर्थिक क्षति स्तर) पार होते ही तुरंत नियंत्रण/छिड़काव करें।
लक्षण-
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लार्वा पत्तियों को मोड़ते हैं, हरे ऊतक को खा जाते हैं और सफेद धारियाँ उत्पन्न करते हैं। सबसे ज्यादा नुकसान अगस्त-अक्टूबर में होता है। जब पत्ती क्षति 10% (ई.टी.एल.) तक पहुँच जाए तो नियंत्रण उपाय अपनाएँ।
यांत्रिक नियंत्रण
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पत्ती मरोड़क का यांत्रिक नियंत्रण फूल आने से पहले ही 20-30 मीटर लंबी जूट की रस्सी को आगे और फिर पीछे की ओर, दोनों तरह से फसल के छत्र को छूते हुए पास करके किया जा सकता है। रस्सी को पार करते समय सुनिश्चित करें कि फसल में पानी खड़ा होना चाहिए।
रासायनिक नियंत्रण
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रोपाई के 15–25 दिन बाद क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 0.4% जीआर @4 किग्रा/एकड़ का बुरकाव करें। इसके बाद रोपाई के 30–40 दिन बाद डेल्टामेथ्रिन 11% डब्ल्यू/डब्ल्यू एससी @60–75 मिली/एकड़ का पर्णीय छिड़काव करें तथा रोपाई के 45–50 दिन बाद क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5% डब्ल्यू/डब्ल्यू एससी @60 मिली/एकड़ या फ्लूबेंडियामाइड 20% डब्ल्यूडीजी @60 ग्राम/एकड़ का छिड़काव करें। नीम-आधारित जैव-कीटनाशक एजाडिरैक्टिन 5% का 100 लीटर पानी/एकड़ में घोल बनाकर छिड़काव करें। कीट की प्रारंभिक अवस्था में नीम-आधारित जैव-कीटनाशक का प्रयोग प्राथमिकता से करें।
जैविक प्रबंधन
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पत्ती मरोड़क कीट की उपस्थिति पर अंड परजीवी ट्राइकोग्रामा चिलोनिस एवं कोपिडोसोमॉप्सिस नाकोलीए @1 लाख/हेक्टेयर की दर से छोड़ें।
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सूंडी परजीवी स्टेनोब्रैकॉन नाइसविलेई एवं एलास्मस प्रजातियों को छोड़ें, जो पत्ती मरोड़क की सूंडियों पर परजीवीकरण करती हैं।
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प्राकृतिक शत्रुओं जैसे कैराबिड भृंग एवं मकड़ियों का संरक्षण करें, जो पत्ती मरोड़क कीट का भक्षण करते हैं।
3. फुदका
पहचान हेतु अनुशंसाएँ
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पौधों के निचले भाग (तना/पत्ती आवरण) पर छोटे भूरे/सफेद रंग के कीट झुंड में दिखाई देते हैं।
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निंफ एवं वयस्क कीट पौधों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियाँ पीली पड़कर सूखने लगती हैं।
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खेत में पौधे गोलाकार या चकत्तेदार स्थानों पर सूखने लगते हैं (हॉपर बर्न)।
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हल्की हलचल होने पर कीट तेजी से कूदते या उड़ जाते हैं।
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हनीड्यू के स्राव के कारण पत्तियों पर सूटी मोल्ड विकसित हो सकती है।
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ईटीएल (आर्थिक क्षति स्तर) पार होते ही तुरंत नियंत्रण/छिड़काव करें।
लक्षण:
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इन कीटों में सफेद पीठ वाला फुदका एवं भूरा फुदका शामिल हैं।
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इन कीटों के निंफ एवं वयस्क जुलाई से अक्टूबर के दौरान विशेष रूप से पत्ती के आवरण से कोशिका रस चूसते हैं। परिणामस्वरूप फसल खेत में चकत्तों के रूप में सूखने लगती है, जिसे हॉपर बर्न कहा जाता है। पौधों के सूखने पर ये कीट समीपवर्ती पौधों पर चले जाते हैं और उन्हें भी नष्ट कर देते हैं। कुछ ही दिनों में सूखे हुए चकत्तों का क्षेत्र बढ़ने लगता है।
ईटीएल: डेड हार्ट 5% होने पर तथा बूटिंग अवस्था (रोपाई के 55–60 दिन बाद) पर पहला छिड़काव करें।
प्रबंधन
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रोपाई के लगभग एक माह बाद खेत में कुछ पौधों को हल्का झुकाकर उनके आधार पर 2–3 बार थपथपाएँ तथा यह निरीक्षण साप्ताहिक अंतराल पर करें। यदि प्रति हिल कम से कम 5 फुदके (ईटीएल) पानी में तैरते हुए दिखाई दें, तो रोपाई के 45–50 दिन बाद फेनमेज़ोडियाटियाज़ 200 ग्राम/लीटर एससी @60 मिली/एकड़ का पर्णीय छिड़काव करें। इसके बाद रोपाई के 70 दिन बाद पाइमेट्रोज़ीन 50% डब्ल्यूजी @120 ग्राम/एकड़ का छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर छिड़काव दोहराएँ। अधिक प्रभावशीलता के लिए नैपसैक स्प्रेयर का उपयोग करें तथा छिड़काव की धार को पौधों के आधार की ओर निर्देशित करें। यदि हॉपर बर्न अवस्था में क्षति दिखाई दे, तो प्रभावित स्थानों के साथ-साथ उनके चारों ओर 3–4 मीटर क्षेत्र में भी तुरंत उपचार करें, क्योंकि इन स्थानों पर कीटों की संख्या अधिक होती है।
जैविक प्रबंधन
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फुदका कीटों की संख्या कम करने हेतु अंड परजीवी गोनाटोसेरस प्रजातियाँ, एनाग्रस प्रजातियाँ तथा ओलिगोसिटा प्रजातियों को छोड़ें।
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बढ़ती हुई सूंडियों पर परजीवीकरण के लिए हैप्लोगोनाटोपस प्रजाति एवं स्यूडोगोनाटोपस प्रजातियों को छोड़ें।
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प्राकृतिक शत्रुओं जैसे कोक्सीनेलिड भृंग, कैराबिड भृंग एवं रोव भृंग का संरक्षण करें, जो धान में इन कीटों की संख्या कम करने में सहायक होते हैं।
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पादप-रक्षक अनुपात (पी:डी) 2 : 1 बनाए रखने से फुदका के विरुद्ध कीटनाशकों के प्रयोग से बचा जा सकता है।
4. चावल का हिस्पा
लक्षण-
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धान हिस्पा एक गंभीर कीट है। इस कीट की सूंडियाँ पत्तियों के अंदर सुरंग बनाकर क्षति पहुँचाती हैं, जबकि वयस्क कीट पत्तियों की बाहरी सतह को खाकर नुकसान पहुँचाते हैं। सूंडियों के प्रकोप से पत्तियों पर चौड़ी सफेद धारियाँ दिखाई देती हैं।
जैविक प्रबंधन
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धान हिस्पा की संख्या कम करने हेतु सूंडी परजीवी ब्रैकॉन प्रजाति का उपयोग करें।
गंधी बग
लक्षण
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दानों पर काले धब्बे दिखाई देते हैं तथा इससे खाली/चाफ़ी दानें बनते हैं।
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यह सामान्यतः धान की मिल्किंग अवस्था में आक्रमण करता है।
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शाम के समय गंधी बग से प्रभावित धान के खेतों से दुर्गंध आती है।
प्रबंधन
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रोपाई के 70 दिन बाद डेल्टामेथ्रिन 11% डब्ल्यू/डब्ल्यू एससी @60–75 मिली/एकड़ का पर्णीय छिड़काव करें। छिड़काव शाम के समय खेत के किनारों से केंद्र की ओर करते हुए करें।
जैविक विधि
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जैविक नियंत्रण एजेंटों में छोटे ततैया इनके अंडों पर परजीवीकरण करते हैं तथा घास के मैदान के टिड्डे इन्हें खाते हैं।
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निंफ एवं वयस्क दोनों ही मकड़ियों, कोक्सीनेलिड बीटल तथा ड्रैगनफ्लाई द्वारा शिकार किए जाते हैं।
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एक फफूंद, निंफ एवं वयस्क दोनों को संक्रमित करती है।
दीमक
लक्षण
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दीमक से प्रभावित पौधों में पीलापन एवं मुरझाना दिखाई देता है, जिससे पौधे अंततः सूख जाते हैं।
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प्रभावित पौधों को हाथ से आसानी से उखाड़ा जा सकता है। दीमक द्वारा क्षतिग्रस्त अंकुरित बीज अंकुरित नहीं हो पाते, जिससे पौध संख्या कम हो जाती है और गंभीर प्रकोप की स्थिति में पुनः बुवाई की आवश्यकता पड़ती है।
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रात्रि के समय दीमक जमीन पर आकर अनियमित रूप से पौधों को जड़ के पास से काट देती है तथा उन्हें बाद में खाने के लिए मिट्टी से ढक देती है।
जैविक विधि’:
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मिट्टी में प्रयोग हेतु मेटाराइज़ियम एनीसोप्लीए 1.0% डब्ल्यूपी @2 किलोग्राम प्रति एकड़ का प्रयोग करें।
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पर्णीय छिड़काव हेतु मेटाराइज़ियम एनीसोप्लीए 2.0% एएस @1 लीटर प्रति 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
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