गेहूं की फसल - जीडब्लू 322 ( कदम 3)

उर्वरक का उपयोग

  • 40:24:16 किग्रा एनपीके/एकड़ — बुवाई के समय 1/3 नाइट्रोजन तथा पूरी फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा बेसल खुराक के रूप में दें, तथा शेष नाइट्रोजन को पहली और दूसरी सिंचाई के समय दो बराबर भागों में दें।

मृदा स्वास्थ्य मे सुधार के लिए दृष्टिकोण

निम्नलिखित रणनीतियाँ मिट्टी पर प्रतिकूल प्रभावों को उलटने में मदद कर सकती हैं।

  • ⬤ जीरो टिलेज और हैप्पी सीडर जैसी संसाधन संरक्षण तकनीकों को अपनाना।
    ⬤ अवशेष प्रबंधन – मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने के लिए फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाना या उन्हें सतह पर बनाए रखना।
    ⬤ अवशेष प्रबंधन और संरक्षण कृषि के लिए नई मशीनरी का विकास तथा उपलब्ध मशीनरी में सुधार करना।
    ⬤ मृदा स्वास्थ्य को पुनः सुधारने और बनाए रखने के लिए मूंग जैसी दलहनी फसलों को शामिल करना।
    ⬤ मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने के लिए हरी खाद का प्रयोग करना।
    ⬤ उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना।
    ⬤ अधिकतम उपज के लिए गोबर की खाद के साथ उचित अनुपात में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का प्रयोग करना तथा आवश्यकता के आधार पर जिंक, मैंगनीज, लोहा, तांबा, मोलिब्डेनम और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग करना।

सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग

जिंक की कमी के लिए-

  • साल में एक बार 10 किलो ग्राम / एकड़ की दर से जिंक सल्फेट या रबी और खरीफ सीजन के दौरान प्रत्येक फसल में 4 किलो ग्राम / एकड़ जिंक सल्फेट डाले। यदि फसल में जिंक की कमी के लक्षण दिखाई दें तो, 0.5% जिंक सल्फेट का घोल बनाकर छिड़काव करें।

मैंगनीज की कमी के लिए-

  • मैंगनीज सल्फेट का 0.5% घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। 1 किलो ग्राम मैंगनीज सल्फेट को 200 लीटर पानी / एकड़ में घोलें। पहला छिड़काव पहली सिंचाई से 2-5 दिन पहले और शेष बचे भाग के 2-3 छिड़काव एक सप्ताह के अंतराल पर करें।

सल्फर की कमी के लिए-

  • कमी को दूर करने के लिए सल्फर को मिट्टी मे डाल कर या छिड़काव करके प्रयोग किया जा सकता है। बुवाई के समय या पहली सिंचाई से ठीक पहले सल्फर 80% डब्लू.डी.जी. @3-4 किलो ग्राम / एकड़ डालें।