
धान की फसल
कीट और रोग प्रबंधन
धान का तना छेदक
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धान के तना छेदक के प्रबंधन के लिए:
• लार्वा जुलाई से अक्टूबर के दौरान तने में छेद करता है।
• इसके कारण युवा पौधों में ‘डेड हार्ट’ (केंद्रीय प्ररोह का पीला पड़कर सूख जाना) तथा परिपक्व पौधों में ‘व्हाइट ईयर’ (खाली, सफेद बालियाँ) दिखाई देती हैं।
प्रबंधन के लिए,
• रोपाई के 25 दिन बाद थायमेथोक्साम 1% + क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 0.5% जीआर @2500 ग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।
• रोपाई के 35–40 दिन बाद आइसोसाइक्लोसेराम 18.1% डबल्यू/डबल्यू एससी @120 मि.ली./एकड़ अथवा क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 9.3% + लैम्ब्डा-सायहैलोथ्रिन 4.6% ज़ेडसी @100 मि.ली./एकड़ का पत्तियों पर छिड़काव करें।
• रोपाई के 60–65 दिन बाद क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 9.3% + लैम्ब्डा-सायहैलोथ्रिन 4.6% ज़ेडसी @100 मि.ली./एकड़ का छिड़काव करें।
• उपरोक्त में से किसी भी कीटनाशी का प्रयोग आवश्यकता अनुसार तब दोहराएँ, जब क्षति आर्थिक क्षति स्तर तक पहुँच जाए, (बाली बनने की प्रारंभिक अवस्था में 5% पौधों में 'डेड हार्ट')
• कीट की प्रारंभिक अवस्था में नीम-आधारित जैव-कीटनाशक का प्रयोग प्राथमिकता से करें।
• रैटून फसल लेने से बचें।
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